होली का त्योहार हिदुओं द्वारा मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्योहार है – जिसे पूरी धूम – धाम से हिंदी कैलेन्डर के हिसाब से हर साल फाल्गुन में मनाया जाता है. इस दिन सभी लोग अपने मित्र – रिश्तेदारों से मिलते है और गले लगते है मिठाइयाँ बनाई जाती है और एक दुसरे को उपहार के रूप में दी जाती है जिससे रिश्तों में प्रेम और अपनत्व के रंग भरता है। इस त्योहार को, भारतीय संस्कृति का सबसे खुबसूरत त्योहार माना जाता है क्योंकि यहाँ रंग बिरंगे खुबसूरत रंगों से भरा हुआ ख़ुशी का प्रतीक होता है .होली मनाने के पीछे कई मान्यताएं प्रचलित है.यहाँ हम सब वहीँ जानेंगे.

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होली पर निबंध | Holi 2022

प्रस्तावना :

भारत में होली का त्योहार फाल्गुन महीने के पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्यता रंग -बिरंगे रंगों से सजी खुशियों का प्रतीक है. इस दिन घरों में अलग अलग किस्म के व्यंजन बनाए जाते है. इस त्यौहार से कुछ दिन पहले से ही लोग घरो की साफ़ -सफाई में जुट जाते है.लोग अपने गिले -शिकवे दूर भूलकर एक दुसरे के घर मिलने जाते है और मिठाई देते है.यह त्योहार अहंकार पर आस्था और अटूट विश्वास की जीत के लिए माना जाता है.

होली मनाने का कारण :

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होली को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि दीति के पुत्र हिरण्यकश्यप बहुत ज्यादा अहंकारी थे और भगवान विष्णु से घोर शत्रुता रखते थे।वे अपने आपको ही भगवान समझते थे और बाकि सबको खुद से तुच्छ समझते थे .उनका एक पुत्र था – प्रहलाद जो भगवन विष्णु का बड़ा भक्त था और उनकी ही पूजा अर्चना करता था.

हिरण्यकश्यप को ये बिलकुल भी पसंद नही था तो वह अपने पुत्र को मना करता है लेकिन वह नहीं मानता. इससे वह बहुत नाराज हो जाता है अपने पुत्र को मारने की कोशिश करने लगता है.

बहुत कोशिश के बावजूद जब वह अपने पुत्र को मरवाने में नाकाम रहा तो उसने अपनी बहिन होलिका की मदद लेने को सोचा. होलिका को भगवान शंकर से वरदान मिला हुआ था। जिसमे उसे वरदान स्वरूप एक चादर मिली हुई थी जिसको ओढकर अगर वह आग में बैठ जाए -तो अग्नि उसे नहीं जला सकती थी. अपने भाई के कहने पर वह प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर बैठ जाती है. पर वह चदर उड़कर प्रहलाद के उपर आ जाती है. जिसकी वजह से होलिका जल जाती है और वह बच जाता है.

होली का त्योहार भारत में फाल्गुन महीने के पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। यह रंगों और खुशियों का त्योहार है। बच्चों में इस दिन बड़ा ही उत्साह रहता है। कई तरह के स्वादिष्ट व्यंजन इस दिन के अवसर के लिए घरों में बनाए जाते हैं। कहा जाता है कि इस दिन सभी लोगों को सारे गिले-शिकवे मिटाकर दोस्ती कर एक नई शुरुआत करनी चाहिए। यही इस त्योहार का उद्देश्य भी है। अहंकार पर आस्था और विश्वास की जीत के कारण यह त्योहार मनाया जाता है।

इसी घटना के बाद से होली के एक दिन पहली रात को होलिका दहन किया जाता है. इस दिन को सभी बुरी-चीजोंका अग्नि में आहुति देने के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. और होलिका के फेरी लगाकर लोग अपनी और दुसरो की मंगल कामना की प्राथना की जाती है. इस दिन को सभी प्रकार की नकारात्मकता को त्यागकर- सकारात्मकता को दिल से अपनाया जाता है।

होलिका दहन के दुसरे दिन को धुलंडी के रूप में मनाया जाता है जिसमे सुबह से ही लोग होली खेलना शुरू कर देते है.एक दुसरे पर रंग -बिरंगे रंग मलते है और ‘ बुरा ना मानो होली है ” से सबको विश करते है.आजकल तो लोग फूलो से भी होली खेलते है .मिट रिश्तेदार पड़ोसी एक दुसरे पर गुलाल लगते है हंसी ठिठोली करते है . छोटे बच्चे इस दिन बड़े बुजर्गो के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लेते है .

उपसंहार :

होली के इस पावन त्यौहार पर कई लोग नशा भी करते है और अपनी सुध – बुध खो देते है. कुछ बुरे लोग इस दिन हानिकारक रंगों का इस्तेमाल करते है इससे कई लोगो की स्किन तो कभी आँखे खराब हो जाती है इसलिए बच्चो को हमेशा बड़ों की निगरानी में ही होली खेलना चाहिए। दूर से गुब्बारे फेंकने से आंखों में घाव भी होने का खतरा रहता है.

आप भी जब दुसरो के रंग लगाए तो ध्यान दे कि कहीं रंग उनकी अंदरूनी अंगो या आँखों में न चला जाए. अगर किसी को अलर्जी हो तो उसे सिर्फ मस्ती मजाक के चक्कर में परेशान नहीं करना चाहिए. इन सब बुराइयों पर जब आप रोक लगा देंगे तो आप भी इस रंग बिरंगी होली में आनंद ले सकते है और आपकी वजह से और लोग परेशान भी नहीं होंगे.


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